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दुनिया का सबसे बुजुर्ग घड़ियाल 83 साल का हुआ, हिटलर के पसंदीदा घड़ियाल सैटर्न की मौत के बाद यह रिकॉर्ड मूजा के नाम हुआ

दुनिया का सबसे बुजुर्ग घड़ियाल मूजा 83 साल का हो गया है। इसे जर्मनी के बेलग्रेड चिड़ियाघर में 1937 (अगस्त) में लाया गया था। इसकी देखरेख करने वाले कर्मचारी का कहना है कि घड़ियाल का जन्म किस तारीख को हुआ, यह हमें नहीं मालूम लेकिन जब इसे चिड़ियाघर में लाया गया, हम उसी तारीख को इसका जन्मदिन मानते हैं। यह हमारे लिए खास है क्योंकि इसने द्वितीय विश्व युद्ध में बमबारी के बाद भी जीने की आस नहीं छोड़ी। इसने संघर्ष किया और आज यह हमारे बीच है।

इसे चूहे खाना पसंद है
चिड़ियाघर के पशु रोग विशेषज्ञ जोजेफ एडवेड के मुताबिक, इसे चूहे खाना काफी पसंद है। यह घड़ियाल बेहद धीरे-धीरे चलने वाला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब मूजा को बेलग्रेड में लाया गया तो इसकी उम्र 2 साल थी।

जोजेफ के मुताबिक, अब मूजा थोड़ा बूढ़ा हो गया है इसलिए उसे अब अधिक हिलना-डुलना पसंद नहीं है। खाना खाने के दौरान भी वह नींद में रहता है। वह माह में एक या दो बार ही बाहर निकलता है। अब मूजा को शिकार करने में दिक्कत होती है इसलिए जू के कर्मचारी ही मांस इसके जबड़े में रखने में मदद करते हैं।

मूूजा को डाइट में पतली स्किन वाले चूहे, खरगोश, चिड़िया, घोड़े का मांस और बीफ दी जाती है।

बमबारी झेलने के बाद भी जिंदा रहा

जू कर्मचारी के मुताबिक, मूजा को पानी में रहना काफी पसंद है, यह अपना 12x7-मीटर वाला पूल छोड़कर कहीं नहीं गया। द्वितीय विश्व युद्ध में बमबारी के दौरान जब चिड़ियाघर के ज्यादातर जानवर मर गए थे, तब मूजा ने संघर्ष किया और हिम्मत नहीं हारी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चिड़ियाघर के 6 कर्मचारी भी मार डाले गए थे।

2012 में गैंगरीन की पुष्टि हुई थी

मूजा को चिड़ियाघर जब लाया गया था जब यूगोस्लाविया साम्राज्य का राज था। उम्र के इस पड़ाव पर मूजा काफी स्वस्थ है। इसकी हालत 2012 में काफी खराब हो गई थी जब उसके दाहिने पंजे में गैंगरीन की पुष्टि हुई थी। सर्जरी करना काफी मुश्किल था लेकिन विशेषज्ञों ने हार नहीं मानी। सर्जरी के बाद मूजा रिकवर हुआ।

सैटर्न की मौत के बाद मूजा ने बनाया रिकॉर्ड
जोजेफ के मुताबिक, दुनिया के सबसे बुजुर्ग घड़ियाल होने का रिकॉर्ड मॉस्को चिड़ियाघर के सैटर्न के नाम था। जिसका जन्म 1936 को हुआ था। सैटर्न की मौत मई में हुई थी। इसके बाद यह रिकॉर्ड मूजा के नाम हो गया।

कौन है सैटर्न, जो हिटलर को काफी प्रिय था

  • सैटर्न जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर के पालतू घड़ियाल था। इसे मॉस्को के चिड़ियाघर में रखा गया था।
  • मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस मगरमच्छ को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश सैनिकों ने बर्लिन में पाया था। जिसे बाद में सोवियत यूनियन की सेना के हवाले कर दिया था।
  • मगरमच्छ की मौत के बाद इसकी जानकारी मॉस्को जू ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल उसका एक वीडियो शेयर करते हुए थी।
सैटर्न
  • 1980 में एक बार जू की छत का एक टुकड़ा उस पर गिरते-गिरते बचा था। एक बार जू पहुंचे एक शख्स ने उसके सिर पर पत्थर से वार किया। मगरमच्छ को काफी चोट आई थीं और महीनों तक उसका इलाज चला था।
  • चिड़ियाघर में इस मगरमच्छ के लिए जब नया एक्वेरियम बनाया गया था तो इसने 4 माह तक खाना नहीं खाया था।
  • 2010 में एक बार फिर उसने एक साल तक बमुश्किल खाना खाया। मॉस्को जू प्रबंधन और कर्मचारियों ने सैटर्न की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया है।


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World's oldest captive alligator marks 83 years in Belgrade zoo after death of hitlers  alligator saturn


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