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कोरोना पर थायरोकेयर की स्टडी और दिल्ली का सर्वे कहीं हर्ड इम्युनिटी का इशारा तो नहीं कर रहा? 6 सवालों के जरिए जानिए जवाब

प्राइवेट लैब थायरोकेयर ने दावा किया है कि भारत की 15 फीसदीआबादी यानी 18 करोड़ भारतीयों में कोरोनावायरस के खिलाफ एंटीबॉडी डेवलप हो चुकी है। वहीं, दिल्ली का सर्वे कहता है कि हर चौथे नागरिक में कोरोनावायरस के खिलाफ एंटीबॉडी है। इसका क्या यह मतलब निकाला जाए कि जिस हर्ड इम्युनिटी का इंतजार था, वह भारत में डेवलप हो चुकी है?

कई लोगों के लिए तो हर्ड इम्युनिटी भी नया जुमला ही है। आइए जानते हैं कि यह क्या है? क्या वैक्सीन के आने से पहले यह वायरस के खिलाफ जंग में किस तरह मददगार साबित हो सकती है?

सबसे पहले जानते हैं, किस आधार पर दावा कर रहा है थायरोकेयर लैब्स?

  • थायरोकेयर टेक्नोलॉजी लिमिटेड एक डायग्नोस्टिक और प्रिवेंटिव केयर लैबोरेटरीकी चेन है। इसका मुख्यालय नवी मुंबई में है। पूरे भारत में इसके 1,122 आउटलेट्स और कलेक्शन सेंटर हैं।
  • थायरोकेयर उन चुनिंदा प्राइवेट लैब्स में से एक है, जिसे सरकार ने कोरोनावायरस जांच की अनुमति दी है। इसी के तहत लैब्स ने 20 दिन में 600 लोकेशंस पर 60,000 टेस्ट किए हैं।
  • थायरोकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर ए. वेलुमणि ने ट्विटर पर लैब्स की ओर से किए गए टेस्ट और उनके नतीजों की रिपोर्ट पोस्ट की है।
  • दावा किया है कि देश की 18 करोड़ आबादी में कोरोनावायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी विकसित हुए हैं। हालांकि, यह रिपोर्ट न तो किसी जर्नल में छपी है और न ही इसका पीयर रिव्यू हुआ है।
  • भिवंडी, ठाणे में एंटीबॉडी टेस्ट के लिए सबसे ज्यादा पॉजीटिविटी रेट 47.1% मिला। मुंबई में 5,485 लोगों का टेस्ट किया गया और उनमें से 1,501 (27.3%) में एंटीबॉडी पाएं।

एंटीबॉडी के विकास और हर्ड इम्युनिटी में संबंध क्या है?

  • हर्ड इम्युनिटी यानी आबादी के एक बड़े हिस्से में किसी वायरस के खिलाफ इम्युनिटी डेवलप हो जाना। इससे वायरस का संक्रमण थम जाता है और बाकी आबादी संक्रमित होने से बच जाती है।
  • कोरोनावायरस के बारे में कई वैज्ञानिक कह रहे हैं कि जब 40 प्रतिशत आबादी को संक्रमण हो जाएगा, तो इसका प्रसार रुक जाएगा। तब कहीं जाकर हम पहले जैसा जीवन जी सकेंगे।
  • थायरोकेयर की रिपोर्ट को मानें तो जिन इलाकों, खासकर महाराष्ट्रमें कोरोनावायरस तेजी से फैला, वहां आबादी के एक बड़े हिस्से में एंटीबॉडी भी विकसित हो रही है।
  • इस रिपोर्ट के दावे की पड़ताल शुरू हो गई है, लेकिन तय है कि यदि आबादी के बड़े हिस्से में एंटीबॉडी विकसित हो गई तो यह वायरस भी आम वायरल इंफेक्शन जैसा ही रह जाएगा।

दिल्ली के बारे में किया जा रहा दावा भी क्या हर्ड इम्युनिटी है?

  • दिल्ली में कराए गए सेरोलॉजिकल सर्वे में 23.5% आबादी में इम्युनोग्लोबुलिन जी एंटीबॉडी विकसित होते देखी गई। यह बताता है कि उनका कोरोनावायरस से सामना हो चुका है।
  • दिल्ली की पूरी आबादी के हिसाब से यदि इन नतीजों को देखें तो हर चौथे दिल्लीवासी के शरीर में इस वायरस के प्रति किसी न किसी तरह की इम्युनिटी डेवलप हो चुकी है।
  • थायरोकेयर की रिपोर्ट, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की पिछले महीने की स्टडी और दिल्ली के बारे में आई रिपोर्ट भारत में हर्ड इम्युनिटी के संकेत देती है।
  • इस बारे में ठोस दावा कोई नहीं कर सकता। यहां तक कि दिल्ली मेंभी सेरोलॉजिकल सर्वे के नतीजों को लेकर भी वैज्ञानिक किसी तरह का दावा करने से बच रहे हैं।

...तो क्या भारत में हर्ड इम्युनिटी की स्टेज आ गई है?

  • नहीं। कोई भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। वैज्ञानिक कह रहे हैं कि हर्ड इम्युनिटी पर निर्भरता बढ़ाई, तो स्वीडन की तरह नुकसान उठाना पड़ेगा। बुजुर्ग आबादी खतरे में आएगी।
  • दरअसल, स्वीडन और यूके ने हर्ड इम्युनिटी की पॉलिसी अपनाई थी। मान लिया था कि जब ज्यादातर लोगों को कोरोनावायरस हो जाएगा तो अपने आप ही इसका संक्रमण थम जाएगा।
  • मार्च और अप्रैल में जब कोरोनावायरस के केस तेजी से बढ़े, तो यूके की बोरिस जॉनसन की सरकार पीछे हट गई और पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया।
  • स्वीडन सरकार ने बाद में पार्शियल हर्ड इम्युनिटी की पॉलिसी को अपनाया। हालांकि, पड़ोसी देशों डेनमार्क और नॉर्वे को मरने वालों की संख्या के मामले में पीछे छोड़ दिया।

क्या हर्ड इम्युनिटी के लिए स्कूल-कॉलेज खोल देना चाहिए?

  • इसे लेकर पक्ष-विपक्ष, दोनों ही मजबूत है। कुछ विशेषज्ञ स्कूल-कॉलेज खोलने के पक्ष में है। इससे 40-50 प्रतिशत आबादी संक्रमित हो जाएगी और हम हर्ड इम्युनिटी की स्टेज पा लेंगे।
  • दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. जुगल किशोर ने कहा, कोरोनावायरस के छह स्ट्रेन हैं। म्युटेट नहीं होते, तो हर्ड इम्युनिटी के चांस बढ़ जाएंगे।डर यह है कि युवा आबादी परिवारों में माता-पिता और दादा-दादी को संक्रमित कर सकती है। इससे हॉस्पिटलाइजेशन और मृतकों की संख्या में तेजी आ सकती है।
  • आईसीएमआर में एपिडेमियोलॉजी के पूर्व प्रमुख ललित कांत ने कहा कि शरीर में विकसित हो रही एंटीबॉडी की न तो मात्रा पता है और न ही इफेक्टिवनेस। उस पर निर्भरता ठीक नहीं।

क्या वैक्सीन के लिए इंतजार करना ही होगा?

  • हां। जब तक वैक्सीन नहीं आता, तब तक हर्ड इम्युनिटी की संभावनाओं पर चर्चा चलती ही रहेगी। लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं सामने आने वाला।
  • एम्स-दिल्ली में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रसून चटर्जी ने कहा, महामारी से यह सोचकर मुकाबला नहीं किया जा सकता कि कल ही हर्ड इम्युनिटी डेवलप हो जाएगी।
  • उन्होंने कहा कि हर्ड इम्युनिटी का इफेक्ट मल्टीप्लायर होता है। हमने डेवलप कर ली तो हम कई लोगों को बचा सकते हैं। हर्ड इम्युनिटी तभी काम करती है जब कुछ वैक्सीनेशन हो।
  • भारत में कुल इंफेक्शन का 15% भी नहीं है। हर्ड इम्युनिटी की इफेक्टिवनेस का कोई सबूत नहीं है। अमेरिका में 20% के आसपास इम्युनिटी है लेकिन बड़ी संख्या में जानें भी गंवाई हैं।
  • मेडिकल जर्नल द लैंसेट में स्पेन की आबादी पर की गई स्टडी में दावा किया है कि कोरोना के मामले में हर्ड इम्युनिटी मुश्किल है। एक अन्य स्टडी ने इसे नामुमकिन बताया है।
  • ऐसे में वैक्सीन आने तक सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, हाथों की स्वच्छता और भीड़भरे आयोजनों को टालना ही हमारे यहां कोरोनावायरस से बचने और मौतें रोकने का मंत्र होना चाहिए।


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