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हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन और रेमडेसिविर में से कौन सी दवा बेहतर, यह ट्रायल रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा : आईसीएमआर

अनलॉक-1 में दी गई ढील को सेलिब्रेशन न समझें। अपने काम करें लेकिन सावधानी के साथ। मास्क पहनना है, हाथ साफ रखना है। ये न सोचें कि ढील इसलिए दी गई है कि सरकार कह रही है कि सबकुछ ठीक हो गया है। सरकार ये जान चुकी है कि लोग अब समझ चुके हैं कि उन्हें वायरस से बचाव कैसे करना है। यह कहना है कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के उप-निदेशक डॉ. रमन आर गंगाखेडकर। आकाशवाणी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने महामारी से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए। जानिए सवाल और उनके जवाब-

#Q-1) हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन और रेमडेसिविर में से कौन सी दवा बेहतर है?
अभी यह नहीं बताया जा सकता क्योंकि दोनों की तुलना ही नहीं की गई है। लेकिन हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कुछ लोगों को दी गई है और जिन्हें नहीं दी गई उन पर ट्रायल चल रहा है। इसके अलावा जो संक्रमितों के सम्पर्क में हैं, उन पर क्या असर करती है, इस पर टेस्टिंग जारी है। दोनों में कौन सी दवा बेहतर है, इसे समझने के लिए अलग-अलग जगहों पर शोध हो रहे हैं रिपोर्ट आने पर ही पता चलेगा।

#Q-2) आने वाले समय में वायरस का क्या भविष्य है?
पहले के जमाने में जब कोई वायरस आता था तो काफी लोगों को मार कर जाता था लेकिन आज वो जमाना नहीं है। जैसे एचआईवी आया था, जिससे लाखों मौत हुई। लेकिन इसकी वैक्सीन आने में काफी समय लगा। अच्छा ये रहा है कि वायरस से संक्रमित होने के बाद भी इंसान को वैक्सीन से ठीक किया जा सकता है। इसी तरह कोरोना है, इसमें अच्छी बात है कि यह लम्बे समय तक शरीर में नहीं रहता। इसको रोकने के लिए अगर कोई दवा या वैक्सीन आती है तो ये वायरस फिर कितने दिन तक नहीं दिखेगा, इस पर अभी कुछ नहीं कह सकते। इसलिए वायरस का भविष्य क्या है केवल इस बारे में न सोचें क्योंकि आज कोरोना है कल कोई नई बीमारी आ सकती है।

#Q-3) अगर वैक्सीन आती है तो कितने प्रतिशत कारगर होगी?
ऐसा वैक्सीन आने के बाद ही तय हो पाएगा। अगर 100 लोगों को वैक्सीन दी जाती है तो उनमें से कितने लोगों पर सफल होगी और कितनों पर विफल यह समय बताएगा। वैक्सीन लेने के बाद इंसान को आगे संक्रमण होगा या नहीं होगा, यह आने वाला समय बताएगा।

#Q-4) संक्रमितों की संख्या इतनी क्यों बढ़ रही है?
संख्या बढ़ रही है क्योंकि पूरे देश में वायरस फैल चुका है। अभी भी एहतियात और खुद को सुरक्षित रखने के लिए बचाव करेंगे तो वायरस को कंट्रोल कर सकते हैं। अभी वायरस का प्रकोप खत्म नहीं हुआ है, इसलिए संक्रमितों की संख्या कम होने के लिए कितना समय लगेगा, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन ये लोगों पर निर्भर है कि वो खुद को बचाने के लिए कितनी सावधानी बरतते हैं। सबसे पहले प्रवासियों का पहुंचना जरूरी है। इससे पहले कि उन्हें संक्रमण हो, उन्हें आइसोलेट कर कर सकते हैं। इसलिए संख्या पर मत जाइए। वायरस के केस आएंगे, आप खुद को सुरक्षित रखें।

#Q-5) अनलॉक-1 में ढील दी जा रही है, आगे की क्या योजना है?
अब हर इंसान को खुद सोचना होगा कि ढील दी गई है तो अपने काम तो करें लेकिन पूरी सावधानी के साथ। मास्क पहनना है, हाथ साफ रखना है। ये न सोचें कि ढील इसलिए दी गई है कि सरकार कह रही है कि सबकुछ ठीक हो गया है, बल्कि सरकार ने इसलिए ढील दी है कि उन्हें पता है कि लोग अब समझ चुके हैं कि उन्हें वायरस से बचाव कैसे करना है।

#Q-6) अनलॉक की इस ढील को कैसे समझें?
इस राहत को सेलिब्रेशन न समझें। ये खुशी न मनाएं की लॉकडाउन खुल रहा है बल्कि खुद कितना सावधान रहना है, यह सोचें। संक्रमित लोगों से कैसे खुद को बचाव करना है। अगर आप संक्रमित होते हैं तो कैसे खुद को ठीक कर सकते हैं और दूसरों को बचा सकते हैं, ये सोचें। बाहर जाएं तो मास्क जरूर लगाएं, इधर-उधर थूकें नहीं, चाहें बीमार हों या न हों। अगर वायरस का संक्रमण नहीं है सामान्य सर्दी-जुकाम भी है तो भी बाहर न निकलें। घर में कोई संक्रमित न हो, इसलिए मास्क लगाकर सावधानी बरतें।



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