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जनवरी में कोरोना ने जकड़ा, फरवरी में शरीर काला पड़ा; अप्रैल में ब्रेन हैमरेज और जून में मौत

चीन के वुहान में कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे जिन दो डॉक्टरों की चमड़ी काली पड़ी थी उनमें से एक की मौत हो गई है। कोरोना के संक्रमण के बाद शरीर काला पड़ने के मामले वुहान सेंट्रल हॉस्पिटल के डॉ. यी फेन और डॉ. हू वीफेंग में सामने आए थे। इनमें से डॉ. हू वीफेंग की मंगलवार को मौत हो गई। डॉ. वीफेंग को जनवरी में कोरोना का संक्रमण हुआ था और करीब 3 महीने से अधिक हॉस्पिटल में भर्ती रहे।

45 दिन वेंटिलेटर पर रहे थे और मानसिक स्थिति बिगड़ी थी
42 वर्षीय यूरोलॉजिस्ट डॉ. हू वीफेंग का संघर्ष तकलीफ दायक रहा। वह 99 दिन तक हॉस्पिटल के बेड पर रहे और 45 दिन वेंटिलेटर पर लाइफ सपोर्ट दिया गया। इनका इलाज करने वाले डॉ. ली शूशेंग का कहना है कि हू की मानसिक स्थिति बेहद नाजुक रही है। जनवरी में संक्रमण हुआ था।7 फरवरी से 22 मार्च तक हू संक्रमण के बुरे दौर से गुजरे। फरवरी में रंग काला पड़ा।धीरे-धीरे हालत में सुधार हुआ और 11 अप्रैल को कुछ बोलने की स्थिति में आए।

सर्जरी को बाद कोमा में गए

हू वीफेंग का इलाज वुहान टॉग्जी हॉस्पिटल में हुआ। यहां के एक डॉक्टर का कहना है कि वीफेंग को 22 अप्रैल को ब्रेन हैमरेज हुआ और सर्जरी की गई। इसके बाद वह कोमा में चले गए और मौत तक उसकी हालत में रहे। हमने सर्जरी की मदद से ब्रेन का फ्लूइड को हटाया था।

ऐसाही साइडइफेक्ट उसी अस्पताल के एक और डॉक्टर में दिखा था
चीनी मीडिया सीसीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. यी पेशे से हृदय रोग विशेषज्ञ हैं और संक्रमण के बाद 39 दिन तक वेंटिलेटर पर रहे। वह रिकवर हो चुके हैं।

कार्डियोलॉजिस्टडॉ. यी फेन जो कोरोना से उबर चुके हैं।

अप्रैल में डॉ. यी के सीसीटीवी को दिए बयान में कहा, कोरोना से जूझने में मैं मानसिक तौर पर काफी प्रभावित हुआ, शरीर टूट गया। मैं बिना मदद के चल-फिर तक नहीं पा रहा था। जब मैंहोश में आयातो अपनी हालत को देखकर दंग रह गया और रिकवरी के लिए काउंसलिंग तक की जरूरत पड़ी।



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Wuhan doctor, 42, whose skin changed colour from coronavirus treatment dies after battling disease for five months


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