Breaking News

नर्सों को परिवार का हिस्सा बना रहे मरीज के परिजन, लव स्टोरी और निजी किस्से शेयर कर रहे ताकि उन्हें सुना सकें

दुनिया भर में कोरोनावायरस के 32 लाख से ज्यादा मामले आ चुके हैं और दो लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। लेकिन संकट के इस दौर में मरीजों के साथ सबसे ज्यादा वक्त कोई बिता रहा है, तो वो हैं नर्स। ऐसी ही एक नर्स हैं न्यूयॉर्क के मेथोडिस्ट हॉस्पिटल की तबाथा केंटनर। उनकी तरह कई नर्सें अब मरीजों के परिवार का हिस्सा बन चुकी हैं।

नर्सने कहा, वे हमें परिवार मानते हैं

तबाथा बताती हैं- "हम मरीजों की देखभाल वैसे ही करते हैं, जैसे अपने परिवार की। यह बड़ी जिम्मेदारी है। मुझे 93 साल के रिटायर्ड सैनिक रिचर्ड स्टेबिंगर की देखभाल की जिम्मेदारी मिली थी। हम उन्हें दादाजी कहते थे। मैं परिवार को उनकेे स्वास्थ्य की जानकारी देती थी। उनकी बेटी शॉन क्रिसवेल और परिवार से रोज बात करती। कभी फोन पर, कभी वीडियो कॉल पर। शॉन ने उनकी लव स्टोरी भी शेयर की, तो मैंने रिचर्ड के कान में धीरे से पूछा- मुझे पता चला है कि आपकी कोई गर्लफ्रेंड है...सुना है उसका नाम जॉर्जिया है। और वे अपना सिर उठाकर हां में हिलाते और हम दोनों हंस पड़ते। एक बार उनकी तबियत इतनी बिगड़ी कि वेंटिलेटर लगाना पड़ा। डॉक्टरों ने बचने की संभावना भी कम बताई। यह बेहद निराशाजनक था। हमने उनके परिवार को बताया। शॉन ने कहा कि मैं उनके सिरहाने खड़ी रहूं, ताकि वे अकेला न महसूस करें। उनसे कहना कि परिवार उन्हें भूला नहीं है और उनसे बहुत प्यार करता है। आखिर एक दिन वे हमें छोड़कर चले गए। उस दिन हम सब रोते रहे। शॉन मुझे छोटी बहन की तरह समझती हैं। हालांकि हम अभी मिले नहीं हैं। ऐसा ही मेरे कई साथियों के साथ हुआ है। जब काम खत्म होगा, तो हम अपने इस नए परिवार से मिलेंगे।''


मरीजों के परिजन बोले- नर्सों ने ईश्वर में भरोसा बढ़ा दिया
मरीज रिचर्ड की बेटी शॉन कहती हैं- ‘नर्सों ने हमारा ईश्वर में भरोसा बढ़ा दिया। तबाथा ने मेरे पिता का बहुत ध्यान रखा। अब वो हमारे परिवार की सदस्य बन गई हैं। पिता का जाना दिल तोड़ने वाला है। हम वहां नहीं थे, पर तबाथा ने हमें साथ रखा। मैंने पहले कभी इस तरह की देखभाल नहीं देखी। हम जल्द ही मिलेंगे।’



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
The relatives of the nurses who are making the nurses a part of the family, are sharing the love story and personal stories so that they can be heard.


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2xukThK

No comments