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गर्मी बढ़ने पर संक्रमण कम होने की उम्मीद नहीं, रेलयात्रा वही लोग करें जो कहीं फंसे हैं और अपने साथ साबुन-सैनेटाइजर लेकर चलें : एक्सपर्ट

क्या तापमान बढ़ने से संक्रमण का खतरा कम होगा, रेल यात्रा के दौरान क्या सावधानी बरतें और गांव में कोरोना का इलाज करा सकते हैं या नहीं... ऐसे कई सवालों के जवाब आरएमएल हॉस्पिटल, नई दिल्ली विशेषज्ञ डॉ. एके वार्ष्णेय ने आकाशवाणी को दिए। जानिए कोरोना से जुड़े सवाल और एक्सपर्ट के जवाब...

#1) ट्रेन में यात्रा करने वाले लोग क्या सावधानी रखें?

सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि अभी ट्रेनें उनके लिए चलाई गई हैं जो कहीं फंस गए हैं। उन्हें उनके घर तक पहुंचाने के इसे शुरू किया गया है। इसलिए अगर आप अपने घर पर हैं या स्थायी रूप से रुके हैं तो बेवजह सफर न करें। इमरजेंसी हो तभी यात्रा करें। जो यात्रा कर रहे हैं उन्हें साबुन या सैनेटाइजर लेकर चलना चाहिए। ट्रेन में कुछ भी खाने पीने से पहले साबुन से हाथ धो लें या सैनेटाइज कर लें। मास्क जरूर लगाएं।

#2) क्या गर्मी बढ़ने से कोरोना का संक्रमण कम हो जाएगा?
अब तक इस बात के प्रमाण नहीं मिले हैं। आपको यह समझने की जरूरत है कि शरीर का सामान्य तापमान 37 डिग्री सेल्सियस (98.5 डिग्री फॉरेनहाइट) होता है। हालांकि थोड़ा कम ज्यादा हो सकता है। जब बाहर का तापमान बढ़ता है तो पसीना आने लगता है। जिससे शरीर का तापमान अपनी जगह वापस आ जाता है। बाहर का तापमान भले ही 40 या 42 डिग्री हो लेकिन शरीर के अंदर का तापमान नहीं बदलता। अगर वायरस शरीर के अंदर पहुंच गया है तो बाहर के तापमान से वायरस पर कोई फर्क नहीं पड़ता। इसलिए यह मत सोचिए कि गर्मी में वायरस का संक्रमण कम हो जाएगा।

#3) क्या गांव के स्थानीय डॉक्टर से कोरोना का इलाज करा सकते हैं?
अभी तक गांव में यह बीमारी ज्यादा नहीं फैली है। अगर गांव में कोरोना के लक्षण दिखते हैं तो स्थानीय प्रशासन से सम्पर्क करें। या हेल्पलाइन पर सम्पर्क करें। कोविड-19 के इलाज की व्यवस्था जिलास्तर पर की गई है। प्रशासन आपको जानकारी देगा कि इलाज के लिए कहां जाना है।

#4) लॉकडाउन के नए स्वरूप में क्या-क्या सावधानी जरूरी है?
कोरोनावायरस को अब 2 महीने हो चुके हैं, सभी वायरस के संक्रमण के खतरे और बचाव को अच्छी तरह जानते हैं। अब जब धीरे-धीरे ढील दी जा रही है तो निकलने पर नाक मुंह को ढकें। इससे वायरस मुंह में प्रवेश नहीं करेगा। बार-बार हाथ को मुंह, नाक या चेहरे पर मत ले जाएं। हाथ को साफ रखें।

#5) क्या कोरोनावायरस ने अपना स्वरूप बदल लिया है?
वायरस अपनी जीन संरचना थोड़ी-बहुत बदलते रहते हैं। कोरोना में भी ऐसा बदलाव आया है। कई देशों में इसके 8 से 10 रूप पाए गए हैं लेकिन डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि इसमें कोई खास बात नहीं है। ये सभी बीटा कोरोनावायरस हैं। इनमें कोई बड़े बदलाव नहीं आए हैं।

#6) कोरोनावायरस से जुड़े क्या-क्या वैज्ञानिक तथ्य सामने आए हैं?
2002 में सार्स वायरस आया था उसे सार्स-1 नाम दिया गया था। इसके बाद मेर्स वायरस आया। कोरोना भी उसी प्रजाति का वायरस है। डब्ल्यूएचओ ने जब इसका जेनेटिक रूप का पता लगाया तो इसे सार्स कोरोना वायरस-2 का नाम दिया। इसमें और सार्स में थोड़ा अंतर है। इसमें अगर एक संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आ गए तो दूसरे को होना ही है। अभी वैक्सीन पर काम चल रहा है और पहले से प्रयोग में ली जा रही दवाओं का प्रयोग किया जा रहा है।



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