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एलजी प्लांट में लीक हुई गैस स्टाइरीन है; सांस में जाए तो 10 मिनट में जान जा सकती है, लम्बे असर में कैंसर होता है

आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम में गुरुवार तड़के एलजी कम्पनी केकेमिकल प्लांट से जो गैस लीक हुई है उसका नाम स्टाइरीन(styrene) गैस है। पुलिस कमिशनर राजीव कुमार मीणा के मुताबिकशुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, प्लांट से स्टाइरीन गैस का रिसाव हो रहा था और इलाके के लोग अनजान थे। डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइरीन एक न्यूरो-टॉक्सिन है और ये दम घोंटू गैस है जिससे सिर्फ दस मिनट में शरीर शिथिल पड़ जाता है और मौत हो जाती है। इस गैस पर हुई स्टडी में इसे कैंसर और जेनेटिक म्यूटेशन का कारण भी बताया गया है।

पीवीसी गैस है बहुत उपयोगी

इसे बोलचाल की भाषा में पीवीसीगैस भी कहते हैंजिसका उपयोग पॉलीविनाइल क्लोराइड (पीवीसी) के रबर, रेसिन, पॉलिस्टर और प्लास्टिकउत्पादन के लिए किया जाता है। पीवीसी एक सिंथेटिक प्लास्टिक है जिसे कठोर या लचीले रूपों में पाया जा सकता है। यह आमतौर पर पाइप और बोतल बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।

मीठी गंध वाली गैस की केमेस्ट्री

स्टाइरीन एक आर्गनिक कम्पाउंड और इसे एथेनिल बेंजीन, विनाइल बेंजीन और फेनिलिथीन के रूप में भी जाना जाता है। इसका केमिकल फार्मूला C6H5CH = CH2 है। यह सबसे लोकप्रिय आर्गनिक सॉल्वेंट बेंजीन से पैदा हुआ पानी की तरह रंगहीन या हल्का सा पीला तैलीय तरल है और इसीसे गैस निकलती है। यह तरलआसानी से कमरे के तापमान पर गैस रूप में हवा में मिल जाता है और इसमें एक मीठी गंध होती है, हालांकि बहुत ज्यादा मात्रा में होने पर गंध दम घोंटने लगती है। स्टाइरीन से पॉलीस्टाइरीन और कई अन्य को-पोलिमर बनाए जाते हैं जो विभिन्न पॉलीमरउत्पाद (प्लास्टिक, फाइबर ग्लास, रबर, पाइप) बनाने के काम आते हैं है।

सांस में जाने पर तत्काल प्रभाव

स्टाइरीन गैस नाक में जाने पर सांस लेना मुश्किल हो जाता है। ऊबकाई के साथ और आंखों में जलन हो सकती है। सांस में जाने पर यह कुछ ही मिनटों में हमारी श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है और उल्टी, जलन और त्वचा पर चकत्ते पैदा कर सकता है।

आंखों में जलन, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल प्रभाव (जैसे पेट खराब होना) और टिश्यूज की ऊपरी सतह में जलन हो सकती है। यह शरीर के कोमल अंगों के टिश्यूज के अस्तर को नष्ट करने की क्षमता रखती है और इसके कारण रक्तस्राव हो सकता है। इससे तुरंत बेहोशी और यहां तक कि कुछ ही मिनटों में मौत भी हो सकती है।

लम्बे समय तक प्रभाव

यहां तक कि जो लोग स्टाइरीन की घातक चपेट में आने के बाद बच जाते हैं, उन्हें बाद में इसके विषैले प्रभावों के साथ जीना पड़ सकता है। न्यूरोटॉक्सिन होने कारण इसका तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव पड़ता है और यह सिरदर्द, थकान, कमजोरी और अवसाद, नर्वस सिस्टम की शिथिलता का कारण बन सकता है। इसके लम्बे प्रभाव के कारण हाथ और पैर जैसे सुन्नता, आंखों को नुकसान, सुनाई न देना और त्वचा पर डर्मीटाइटिस जैसी बीमारी देखने को मिलती है।

तुरंत उपचार

गैस के प्रभाव का इलाज करने का एकमात्र तरीका त्वचा और आंखों को पानी से धोना है और सांस के साथ अंदर जाने की स्थिति में तुरंत मेडिकल चिकित्सा शुरू करके ब्रीदिंग सपोर्ट पर जाना है।

भोपाल की मिकVsविशाखापट्टनम की स्टाइरीन गैस

मध्यप्रदेश के भोपाल में अमेरिकी यूनियन कार्बाइड कंपनी के कारखाना में 3 दिसंबर 1984 को 42 हजार किलो जहरीली गैस का रिसाव होने से करीब 15 हजार से अधिक लोगों की जान गई थी और लाखों प्रभावित हुए थे। यह गैस भी एक आर्गनिक कम्पाउंड से निकली मिथाइल आईसोसाइनेट या मिक गैस थी जो कीटनाशक और पॉली प्रॉडक्ट बनाने की काम आती है।

इतने साल के बाद भी इस गैस का असर पुराने भोपाल शहर के लोगों में देखा जा सकता है। हजारों लोग स्थायी अपंगता, कैंसर और नेत्रहीनता का शिकार हो गए। इस गैस ने अजन्में बच्चों तक को प्रभावित किया था। जहां विशाखापट्टनम प्लांट से निकली स्टाइरीन का रिएक्शन टाइम 10 मिनट का है, वहीं मिक गैस महज कुछ सेकंड में जान चली जाती है।



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Leaked gas styrene in Visakhapatnam; If breathed in, it kills life in 10 minutes, cancer results in long effect.


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