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दुनियाभर में की प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिक जुटे हैं कोरोना के वैक्सीन के परीक्षण में

नई दिल्ली. भारतमेंकोरोनावायरस के बढ़ते खतरे की बीचकेंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने राज्यसभा में कहा है किदेश कोरोनावायरस का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह से तैयार है और घबराने की जरूरत नहीं है।डॉ हर्षवर्धन ने बताया कि कोरोना वायरस की वैक्सीन की टेस्टिंग चल रही है और सरकार पहले ही दिन से मुस्तैद है।

हालांकि चाहे चीन हो, इटली हो या फिर अमेरिका, लॉकडाउन और आइसोलेशन जैसे कड़े कदमोंके बाद COVID- 19 को रोकने में मनचाहीसफलता नहीं मिल रहीहै।वैश्विक महामारी घोषित होने के बादअब सबकीउम्मीदेंइसके वैक्सीन की ओर लगी हैं।

मेडिकल साइंस का अपडेट:दुनियाभर में 50 से ज्यादा मेडिकल इंस्टीट्यूट औरकंपनियांCOVID- 19 कावैक्सीन बनाने में दिन-रात जुटी हैं। चीन, अमेरिका और इजराइल कीचार कम्पनियां तो वैक्सीन काजानवरों पर परीक्षण भी कर चुकी हैं। अमेरिका केबोस्टन की बेस्ट बायोटेक कंपनी मोडेर्नाने 16 मार्च को बड़ा और साहसिक कदम उठाते हुए इंसानों पर भी वैक्सीन का परीक्षण शुरू कर दिया है। चीन ने सबसे पहलेसार्स-CoV-2 के जेनेटिक मटेरियल की जांच पूरी करके उसे जनवरी में ही दुनियाभर के वैज्ञानिकों के साथ साझा कर लिया था, इसके बाद प्रोटोटाइप और अब प्रभावीवैक्सीन बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।

भारत से अपडेट :इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने बताया कि पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ विरोलॉजी (एनआईवी) के वैज्ञानिकों को यह सफलता मिली है। वायरस के स्ट्रेन्स को अलग करने से इसकी जांच के लिए किट बनाने, दवा का पता लगाने और टीके का शोध करने में काफी मदद मिल सकेगी। अभी तक अमेरिका, जापान, थाईलैंड और चीन ही दुनिया में चार ऐसे देश हैं, जिन्हें ये कामयाबी मिली है।

चीन से अपडेट:चाइना सेंट्रल टेलीविजन के मुताबिक यहां वुहान में सबसे पहले कोरोना के मामले सामने आने के बाद चीन सरकार, सेना और यहां की कंपनियां ठोस समाधान खोजने में लगी हैं। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की मेडिकल विशेषज्ञ53 साल की शेन वेई के नेतृत्व वालीटीम कोरोना का वैक्सीन का के क्लिनिकल एप्लीकेशन बनाने में सफल हो गई हैं। इस टीम नेसार्सऔर इबोला जैसे खतरनाक वायरस से बचने की वैक्सीन बनाई थी।चीनी सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है किmRNA वैक्सीन को CDC, शंघाई स्थित टोंगजी यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन और Stermirna Therapeutics Co., Ltd द्वारा सह-विकसित किया गया था। रविवार को वैक्सीन के नमूनों को 100 से अधिक चूहों में इंजेक्ट किया गया था। सीडीसी के एक अधिकारी ने बताया कि पशु परीक्षण टीका विकास के बहुत शुरुआती चरण में है और मनुष्यों पर टीका लगाने के लिए तैयार होने से पहले अभी भी कई कदम उठाए जाने हैं।

इजराइल से अपडेट:यहां केअखबार हारेज की खबर के मुताबिक,प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत आने वाले इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोलोजिकल रिसर्च ने COVID-19 का वैक्सीन बनाने की दिशा में सबसे तेज कदम बढ़ाएहैं।इजराइल के रक्षा मंत्री ने बताया कि वैज्ञानिकों ने कोरोनावायरस की विशेषताएं और जैविक कार्यप्रणालीकी पहचान करने में सफलता हासिल की है।उन्होंने बताया कि संस्थान में 50 से अधिक अनुभवी वैज्ञानिक वैक्सीन बनाने में जुटे हैं। हालांकि, इस टीके को इंसानों में परीक्षण के लिए अभी कई चरणों से गुजरना है और इस काम मेंमहीनों लग सकते हैं। जानवरों के बाद इंसानों में सफल परीक्षण के बाद इसेअमेरिका की खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) औरविश्व स्वास्थय संगठन (WHO) से मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

अमेरिकासे अपडेट:न्यूज एजेंसी एपीकी रिपोर्ट के मुताबिक,अमेरिका ने कोरोना वायरस पर वैक्सीन तैयार की है जिसका ट्रायल सोमवार को हुआ।सिएटल की काइज़र परमानेंट रिसर्च फैसिलिटी मेंसबसे पहले यह वैक्सीन दो बच्चों की मां43 वर्षीय जेनिफर नाम कीमहिला को लगाया गया। पहले ट्रायल में 45 स्वस्थ युवा शामिल किए गए हैं। ये कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं है लेकिन वैक्सीन के साइड इफेक्ट पता लगाने के लिएपहले इन्हें शामिल किया गया है।वैक्सीन को अमेरिकी फार्मा कंपनी मॉडर्नाने तैयार किया और इसकी फंडिंग कर रहे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के साथ मिलकर ट्रायल किया जा रहा है। ट्रायल में सफलता मिलने पर भी इसे तैयार करने में 18 महीने लगेंगे।सामान्य तौर पर किसी भी वैक्सीन का पहला परीक्षण जानवरों पर किया जाता है, लेकिन इस बार इसका सीधा मानवीय परीक्षण किया गया है।



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